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सोरायसिस ठीक होने के बाद त्वचा का रंग गहरा या हल्का क्यों रह जाता है? – Why Does Skin Stay Dark or Light After Psoriasis Clears? in hindi

इस लेख का परिचय:

सोरायसिस ठीक होने के बाद त्वचा का रंग गहरा या हल्का क्यों रह जाता है? – Why Does Skin Stay Dark or Light After Psoriasis Clears? in hindi – कई बार सोरायसिस का पैच ठीक होने लगता है। खुजली कम हो जाती है, त्वचा पर जमी परतें हट जाती हैं और कुछ समय बाद वह हिस्सा पहले जैसा शांत भी दिखाई देने लगता है। लेकिन तभी एक दूसरी बात नजर आती है। जहां पहले सोरायसिस था, वहां की त्वचा आसपास की त्वचा से ज्यादा काली दिखाई दे रही है। कुछ लोगों में इसके उलट वह हिस्सा हल्का या सफेद-सा नजर आने लगता है।

ऐसे समय में मन में सवाल आना स्वाभाविक है, क्या सोरायसिस अभी भी है? क्या दवा की वजह से त्वचा का रंग बदल गया है? क्या यह निशान हमेशा रहेगा? हर बार ऐसा नहीं होता।

सोरायसिस की सूजन ठीक होने के बाद भी त्वचा का रंग सामान्य होने में समय लग सकता है। त्वचा पर बचा हुआ गहरा या हल्का रंग अक्सर पिछली सूजन से जुड़ा होता है। इसे मेडिकल भाषा में post-inflammatory hyperpigmentation या post-inflammatory hypopigmentation कहा जाता है। मध्यम से गहरे रंग की त्वचा में ये बदलाव ज्यादा साफ दिखाई दे सकते हैं।

सोरायसिस ठीक हो गया, फिर भी निशान क्यों रह गया?

यह समझना जरूरी है कि सोरायसिस का ठीक होना और त्वचा का अपना पुराना रंग वापस पाना हमेशा एक ही समय पर नहीं होता। जब सोरायसिस सक्रिय होता है, तब त्वचा में सूजन होती है। सूजन कम होने के बाद पपड़ी और खुजली तो जल्दी कम हो सकती है, लेकिन त्वचा के रंग को सामान्य होने में ज्यादा समय लग सकता है।

ऐसा कुछ हद तक उस निशान जैसा है जो किसी चोट या मच्छर के काटने के बाद रह जाता है। असली समस्या खत्म हो जाती है, लेकिन त्वचा पर उसका निशान कुछ समय तक दिखाई देता रहता है। इसलिए अगर सोरायसिस वाले पुराने हिस्से पर अब केवल हल्का या गहरा रंग दिखाई दे रहा है और वहां कोई नई पपड़ी या सूजन नहीं है, तो जरूरी नहीं कि सोरायसिस अभी भी सक्रिय हो।

सोरायसिस के बाद त्वचा काली क्यों हो जाती है?

त्वचा का रंग गहरा होने का एक कारण सूजन के बाद होने वाला pigmentation है। इसे post-inflammatory hyperpigmentation कहा जाता है। हमारी त्वचा में मेलॅनीन नामक पिगमेंट होता है, जो त्वचा के रंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सूजन के दौरान इस pigment की मात्रा या उसका वितरण प्रभावित हो सकता है। जब सोरायसिस ठीक हो जाता है, तब भी उसका असर कुछ समय तक त्वचा के रंग में दिखाई दे सकता है।

इसी वजह से किसी पुराने सोरायसिस पॅच की जगह भूरी या गहरी त्वचा दिखाई दे सकती है। यह बदलाव केवल सोरायसिस में ही नहीं होता। मुंहासे, कीड़े के काटने या त्वचा की किसी दूसरी सूजन के बाद भी गहरे निशान रह सकते हैं।

कभी-कभी त्वचा हल्की क्यों हो जाती है?

हर व्यक्ति में त्वचा गहरी नहीं होती। कुछ लोगों में सोरायसिस ठीक होने के बाद वही हिस्सा आसपास की त्वचा से हल्का दिखाई देता है। इसे post-inflammatory hypopigmentation कहा जाता है।

सूजन कभी-कभी त्वचा में पिगमेंट बनाने वाली कोशिकाओं के सामान्य काम को प्रभावित कर सकती है। इसके कारण प्रभावित जगह पर पिगमेंट कम दिखाई दे सकता है और त्वचा का रंग हल्का लग सकता है।

सोरायसिस में इस तरह के हल्के रंग के बदलाव का भी अध्ययन किया गया है। इसलिए सोरायसिस ठीक होने के बाद हल्का पैच दिखाई देना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि त्वचा को स्थायी नुकसान हुआ है।

सांवली या गहरी त्वचा में ये निशान ज्यादा क्यों दिखाई देते हैं?

जिन लोगों की त्वचा का रंग भूरा या गहरा होता है, उनमें पिगमेंटेशन में छोटा बदलाव भी काफी साफ दिखाई दे सकता है। इसी कारण कई लोगों को लगता है कि उनका सोरायसिस अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुआ है, जबकि असल में सूजन और पपड़ी पहले ही खत्म हो चुकी होती है।

सोरायसिस का रूप भी अलग-अलग skin tones में अलग दिखाई दे सकता है। गहरी त्वचा पर यह हमेशा चमकीले लाल रंग का नहीं दिखता। कभी-कभी यह गहरा भूरा या बैंगनी जैसा दिखाई दे सकता है। सोरायसिस ठीक होने के बाद बचा हुआ पिगमेंटेशन भी इसी वजह से ज्यादा नोटिस हो सकता है।

क्या ये निशान स्कार होते हैं?

स्कार यानी दाग और पिगमेंटेशन में अंतर होता है। स्कार में त्वचा की संरचना बदल सकती है, जबकि पिगमेंटेशन में मुख्य रूप से त्वचा का रंग बदलता है। इसलिए अगर सोरायसिस ठीक होने के बाद वहां सिर्फ भूरा या हल्का रंग बचा है, तो इसे देखकर तुरंत यह मान लेना सही नहीं है कि त्वचा पर स्थायी स्कार बन गया है।

फिर भी, हर नए या बदलते हुए स्कीन पॅच को केवल पुराने सोरायसिस से जोड़ना ठीक नहीं है। अगर वह हिस्सा फैल रहा है, दर्द कर रहा है या उसमें फिर से खुजली और पपड़ी आने लगी है, तो उसकी जांच करवाना बेहतर है।

त्वचा का रंग सामान्य होने में कितना समय लगता है?

यही सवाल ज्यादातर लोगों के मन में आता है। दुर्भाग्य से इसका कोई एक तय समय नहीं है। कुछ लोगों में कुछ महीनों में धीरे-धीरे रंग सामान्य होने लगता है। कुछ लोगों में यह बदलाव एक साल या उससे भी अधिक समय तक दिखाई दे सकता है। कुछ dermatology guidance के अनुसार, सोरायसिस के बाद त्वचा के गहरे या हल्के पैच को ठीक होने में लगभग 3 से 12 महीने या उससे अधिक समय लग सकता है।

यह व्यक्ति की त्वचा, सूजन की तीव्रता, सोरायसिस कितने समय तक रहा और शरीर के किस हिस्से पर था जैसी बातों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए कुछ हफ्तों के बाद भी निशान दिखाई दे रहा हो, तो इसका मतलब यह नहीं है कि त्वचा ने ठीक होना बंद कर दिया है।

इलाज के बाद त्वचा ज्यादा काली क्यों दिख सकती है?

कभी-कभी सोरायसिस का इलाज शुरू करने के बाद त्वचा का रंग ज्यादा गहरा दिखाई देने लगता है। इससे व्यक्ति को लग सकता है कि दवा से कोई नुकसान हुआ है। लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता।

कई बार सोरायसिस की सूजन और पपड़ी कम होने के बाद पहले से मौजूद पिगमेंटेशन ज्यादा साफ दिखाई देने लगता है। कुछ ट्रीटमेंट्स त्वचा के रंग को भी प्रभावित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, फोटोथेरपी से ट्रीटेड स्कीन कुछ समय के लिए डार्कर हो सकती है। इसलिए इलाज के दौरान कोई नया बदलाव दिखाई दे तो अपनी मर्जी से दवा बंद करने के बजाय डॉक्टर से बात करना बेहतर है। 

कैसे पता चले कि यह सिर्फ निशान है या सोरायसिस वापस आ रहा है?

केवल रंग देखकर इसका पता लगाना हमेशा आसान नहीं होता। अगर पुराना पैच अब बिल्कुल सपाट है, वहां पपड़ी नहीं है और खुजली या सूजन भी नहीं है, तो यह केवल पिगमेंटेशन हो सकता है।

लेकिन अगर वही हिस्सा फिर से मोटा या उभरा हुआ महसूस होने लगे, पपड़ी आने लगे, खुजली बढ़ने लगे या सूजन दिखाई देने लगे, तो अॅक्टिव सोरायसिस की संभावना हो सकती है। यानी केवल त्वचा का रंग पूरी कहानी नहीं बताता।

अगर आपको समझ नहीं आ रहा कि पुराना निशान है या सोरायसिस फिर से सक्रिय हो रहा है, तो स्कीन एक्सामिनेशन करवाना बेहतर है।

क्या बार-बार खुजलाने से निशान गहरा हो सकता है?

हो सकता है। सोरायसिस की खुजली बहुत परेशान कर सकती है। कई बार त्वचा बेहतर होने के बाद भी खुजलाने की आदत बनी रहती है। बार-बार खुजलाने या रगड़ने से त्वचा में दोबारा इरिटेशन और इनफ्लामेशन हो सकता है। इससे पिगमेंटेशन भी लंबे समय तक रह सकता है।

इसलिए अगर सोरायसिस काफी हद तक ठीक होने के बाद भी खुजली बनी हुई है, तो केवल उसे सहने के बजाय उसके कारण के बारे में डॉक्टर से बात करना उपयोगी हो सकता है।

क्या गहरे निशान को जल्दी हटाने के लिए कोई क्रीम लगानी चाहिए?

निशान जल्दी हटाने की इच्छा बिल्कुल समझ में आती है। खासकर जब निशान चेहरे, गर्दन, हाथ या शरीर के किसी दिखाई देने वाले हिस्से पर हो। लेकिन इस मामले में जल्दबाजी कभी-कभी समस्या बढ़ा सकती है। बहुत तेज स्क्रब, बिना सलाह के ब्लीचिंग प्रोडक्ट्स या त्वचा को इरीटेट करने वाले केमिकल्स लगाने से दोबारा इनफ्ला  हो सकता है। और इनफ्लामेशन पिगमेंटेशन को और ज्यादा नोटीसेबल  बना सकता है।

इसलिए पहले यह समझना जरूरी है कि त्वचा का रंग क्यों बदला है। अगर यह सोरायसिस के बाद का पिगमेंटेशन है, तो कई मामलों में समय के साथ इसमें सुधार हो सकता है। अगर निशान लंबे समय तक बना रहता है या आपको बहुत परेशान करता है, तो डॉक्टर से उचित विकल्पों के बारे में बात करें।

इस दौरान आप अपनी त्वचा की देखभाल कैसे कर सकते हैं?

त्वचा को ठीक होने के लिए बहुत सारी चीजों की जरूरत नहीं होती। प्रभावित हिस्से को धीरे से साफ करें। जरूरत हो तो जेंटल लोशन इस्तेमाल करें। बार-बार खुजलाने या रगड़ने से बचें। अगर धूप में जाना हो तो उचित सन प्रोटेक्शन रखें, क्योंकि धूप कुछ प्रकार के डार्क पॅचेस को और ज्यादा नोटिसेबल बना सकती है। 

और सबसे जरूरी बात, अॅक्टिव सोरायसिस को नियंत्रित रखना भी जरूरी है। अगर नए पॅचेस बार-बार बनते रहेंगे, तो पिगमेंटेशन की समस्या भी बार-बार हो सकती है।

भारतीय त्वचा में यह समस्या ज्यादा परेशान क्यों कर सकती है?

भारत में बहुत से लोगों की त्वचा का रंग भूरा या सांवला होता है। ऐसी त्वचा में पिगमेंटेशन का छोटा बदलाव भी काफी आसानी से दिखाई देता है। इसलिए सोरायसिस ठीक होने के बाद भी पुरानी जगह का रंग अलग दिख सकता है। इससे कई मरीजों को लगता है कि बीमारी अभी पूरी तरह ठीक नहीं हुई।

लेकिन अगर वहां सूजन, पपड़ी और खुजली नहीं है और केवल रंग बदला हुआ है, तो यह हिलिंग के बाद बचा हुआ पिगमेंटशन हो सकता है। इंटरनेट पर मौजूद तस्वीरों से अपनी त्वचा की तुलना करना भी हमेशा सही नहीं होता। अलग-अलग स्कीन टोन्स में सोरायसिस और उसके ठीक होने के बाद के बदलाव अलग दिखाई दे सकते हैं।

कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर सोरायसिस के बाद त्वचा का रंग थोड़ा बदल गया है, तो हर बार घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर पॅच लगातार फैल रहा है, दर्द हो रहा है, बहुत ज्यादा खुजली होने लगी है या फिर से पपड़ी बनने लगी है, तो उसे दिखाना चाहिए। इसी तरह, अगर नया डार्क या लाइट पॅच ऐसी जगह दिखाई दे जहां पहले सोरायसिस था ही नहीं, तो उसकी जांच करवाना बेहतर है।

कई अलग-अलग कारणों से त्वचा का रंग बदल सकता है। इसलिए हर डार्क या लाइट पॅच को केवल सोरायसिस का निशान मान लेना सही नहीं है।

निष्कर्ष:

सोरायसिस ठीक होने के बाद त्वचा का रंग कुछ समय तक अलग दिखाई देना असामान्य नहीं है। किसी में त्वचा गहरी हो सकती है, तो किसी में हल्की। ये बदलाव अक्सर पिछली सूजन से जुड़े होते हैं और कई बार धीरे-धीरे कम हो जाते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि केवल रंग देखकर यह तय न करें कि सोरायसिस अभी भी सक्रिय है। अगर त्वचा सपाट है और पपड़ी, सूजन और खुजली खत्म हो चुकी है, तो संभव है कि बीमारी शांत हो चुकी हो और त्वचा अभी अपने पुराने रंग में लौट रही हो।

त्वचा को थोड़ा समय दें। अनावश्यक क्रीम्स या घरेलू नुस्खों से इरिटेशन न बढ़ाएं और अगर कोई बदलाव लगातार बढ़ रहा है या आपको समझ नहीं आ रहा कि यह पिगमेंटेशन है या अॅक्टिव सोरायसिस, तो डॉक्टर से इसकी जांच करवाएं। कई बार सोरायसिस पहले ठीक होता है और त्वचा का रंग बाद में सामान्य होता है।

सोरायसिस के बाद त्वचा का रंग बदल गया है?
काली या हल्की त्वचा देखकर चिंता होना स्वाभाविक है। लेकिन हर रंग परिवर्तन का कारण एक जैसा नहीं होता। सही कारण समझना और उचित सलाह लेना आपकी त्वचा की देखभाल के लिए महत्वपूर्ण है। अपनी त्वचा के बारे में उचित सलाह पाने के लिए आज ही संपर्क करें। – https://psoriatreat.com/new-appointment/

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:

1. सोरायसिस ठीक होने के बाद त्वचा काली क्यों हो जाती है?
सोरायसिस के कारण त्वचा में हुई सूजन के बाद प्रभावित जगह का रंग कुछ समय के लिए गहरा हो सकता है। इसे सूजन के बाद होने वाला गहरा रंग कहा जाता है। यह जरूरी नहीं कि सोरायसिस अभी भी सक्रिय हो।

2. सोरायसिस के बाद त्वचा का रंग हल्का क्यों हो जाता है?
कुछ लोगों में सूजन के बाद त्वचा का रंग आसपास की त्वचा से हल्का हो सकता है। ऐसा त्वचा में रंगद्रव्य बनाने वाली कोशिकाओं की गतिविधि में अस्थायी बदलाव के कारण हो सकता है।

3. क्या सोरायसिस के बाद बचे काले या हल्के निशान हमेशा रहते हैं?
नहीं। कई मामलों में त्वचा का रंग धीरे-धीरे सामान्य हो जाता है। इसमें कुछ महीने लग सकते हैं और कुछ लोगों में इससे अधिक समय भी लग सकता है।

4. कैसे पता चले कि यह पुराना निशान है या सोरायसिस फिर से शुरू हो गया है?
अगर त्वचा केवल गहरी या हल्की है और वहां खवले, सूजन या बढ़ती हुई खुजली नहीं है, तो यह पुराने सोरायसिस के बाद का रंग परिवर्तन हो सकता है। अगर फिर से खवले, सूजन, मोटापन या खुजली शुरू हो जाए, तो डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए।

5. क्या सोरायसिस के बाद बचे काले निशान के लिए कोई क्रीम लगानी चाहिए?
बिना सलाह के कोई तेज असर वाली क्रीम या त्वचा का रंग हल्का करने वाला उत्पाद न लगाएं। इससे त्वचा में जलन हो सकती है और रंग का बदलाव बढ़ सकता है। पहले इसका कारण समझना और जरूरत होने पर त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

लेखक –

यह लेख डॉ. आर. एस. सोनावणे ने लिखा है।
एम.डी. (होम्योपैथी), डीआई (होम्योपैथी), लंदन
भारत में सोरायसिस स्पेशलिस्ट डॉक्टर

डॉ. आर. एस. सोनावणे भारत के पहले होम्योपैथिक सोरायसिस स्पेशलिस्ट हैं, जिन्हें सोरायसिस और इससे जुड़ी पुरानी स्किन की बीमारियों का इलाज करने में 39 साल से ज़्यादा का अनुभव है। वे एक समग्र, मरीज़-केंद्रित दृष्टिकोण का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने होम्योपैथी में एडवांस्ड ट्रेनिंग ली है और हज़ारों मरीज़ों को सोरायसिस से लंबे समय तक राहत दिलाने में मदद की है। वे इसके लिए पर्सनलाइज़्ड, इम्यून-बैलेंसिंग ट्रीटमेंट प्लान बनाते हैं जो सिर्फ़ लक्षणों के बजाय बीमारी की जड़ पर काम करते हैं।

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